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Vivaan Chauhan Social · Mixed · Social

*1. जिदंगी मे कभी भी किसी को* *बेकार मत समझना,क्योक़ि* *बंद पडी घडी भी दिन में* *दो बार सही समय बताती है।* *2. किसी की बुराई तलाश करने* *वाले इंसान की मिसाल उस* *मक्खी की तरह है जो सारे* *खूबसूरत जिस्म को छोडकर* *केवल जख्म पर ही बैठती है।* *3. टूट जाता है गरीबी मे* *वो रिश्ता जो खास होता है,* *हजारो यार बनते है* *जब पैसा पास होता है।* *4. मुस्करा कर देखो तो* *सारा जहाॅ रंगीन है,* *वर्ना भीगी पलको* *से तो आईना भी* *धुधंला नजर आता है।* *5..जल्द मिलने वाली चीजे* *ज्यादा दिन तक नही चलती,* *और जो चीजे ज्यादा* *दिन तक चलती है* *वो जल्दी नही मिलती।* *6. बुरे दिनो का एक* *अच्छा फायदा* *अच्छे-अच्छे दोस्त* *परखे जाते है ।* *7. बीमारी खरगोश की तरह* *आती है और कछुए की तरह* *जाती है;* *जबकि पैसा कछुए की तरह* *आता है और.खरगोश की* *तरह जाता है ।* *8. छोटी छोटी बातो मे* *आनंद खोजना चाहिए* *क्योकि बङी बङी तो* *जीवन मे कुछ ही होती है।* *9. ईश्वर से कुछ मांगने पर* *न मिले तो उससे नाराज* *ना होना क्योकि ईश्वर* *वह नही देता जो आपको* *अच्छा लगता है बल्कि* *वह देता है जो आपके लिए* *अच्छा होता है* *10. लगातार हो रही* *असफलताओ से निराश* *नही होना चाहिए क्योक़ि* *कभी-कभी गुच्छे की आखिरी* *चाबी भी ताला खोल देती है।* *11. ये सोच है हम इसांनो की* *कि एक अकेला* *क्या कर सकता है* *पर देख जरा उस सूरज को* *वो अकेला ही तो चमकता है।* *12. रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो* *उन्हे तोङना मत क्योकि* *पानी चाहे कितना भी गंदा हो* *अगर प्यास नही बुझा सकता* *वो आग तो बुझा सकता है।* *13. अब वफा की उम्मीद भी* *किस से करे भला* *मिटटी के बने लोग* *कागजो मे बिक जाते है।* *14. इंसान की तरह बोलना* *न आये तो जानवर की तरह* *मौन रहना अच्छा है।* *15. जब हम बोलना* *नही जानते थे तो* *हमारे बोले बिना"माँ*" *हमारी बातो को समझ जाती थी।* *और आज हम हर बात पर* *कहते है छोङो भी "माँ"* *आप नही समझोंगी।* *16. शुक्र गुजार हूँ* *उन तमाम लोगो का* *जिन्होने बुरे वक्त मे* *मेरा साथ छोङ दिया* *क्योकि उन्हे भरोसा था* *कि मै मुसीबतो से* *अकेले ही निपट सकता हूँ।* *17. शर्म की अमीरी से* *इज्जत की गरीबी अच्छी है।* *18. जिदंगी मे उतार चङाव* *का आना बहुत जरुरी है* *क्योकि ECG मे सीधी लाईन* *का मतलब मौत ही होता है।* *19. रिश्ते आजकल रोटी* *की तरह हो गए है* *जरा सी आंच तेज क्या हुई* *जल भुनकर खाक हो जाते।* *20. जिदंगी मे अच्छे लोगो की* *तलाश मत करो* *खुद अच्छे बन जाओ* *आपसे मिलकर शायद* *किसी की तालाश पूरी हो।*

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