‼🐚‼🐚🙏🐚‼🐚‼ दादी माँ बनाती थी.. रोटी !! पहली.. गाय की , और आखरी.. कुत्ते की..! हर सुबह.. नन्दी आ जाता था , दरवाज़े पर.. गुड़ की डली के लिए..! कबूतर का.. चुग्गा , चीटियों.. का आटा..! शनिवार, अमावस, पूर्णिमा का सीधा.. सरसों का तेल , गली में.. काली कुतिया के ब्याने पर.. चने गुड़ का प्रसाद..! सब कुछ.. निकल आता था ! वो भी उस घर से.., जिसमें.. भोग विलास के नाम पर.. एक टेबल फैन भी न था..! आज.. सामान से.. भरे घरों में.. कुछ भी.. नहीं निकलता ! सिवाय लड़ने की.. कर्कश आवाजों के.! ....हमको को आज भी याद है - मकान चाहे.. कच्चे थे लेकिन रिश्ते सारे.. सच्चे थे..!! चारपाई पर.. बैठते थे , दिल में प्रेम से.. रहते थे..! सोफे और डबल बैड.. क्या आ गए ? दूरियां हमारी.. बढा गए..! छतों पर.. सब सोते थे ! बात बतंगड.. खूब होते थे..! आंगन में.. वृक्ष थे , सांझे.. सबके सुख दुख थे..! दरवाजा खुला रहता था , राही भी.. आ बैठता था...! कौवे छत पर.. कांवते थे मेहमान भी.. आते जाते थे...! एक साइकिल ही.. पास था , फिर भी.. मेल जोल का वास था..! रिश्ते.. सभी निभाते थे , रूठते थे , और मनाते थे...! पैसा.. चाहे कम था , फिर भी.. माथे पे.. ना कोई गम था..! मकान चाहे.. कच्चे थे , पर..रिश्ते सारे सच्चे थे..!! अब शायद..सब कुछ पा लिया है ! पर.. लगता है कि.. बहुत कुछ गंवा दिया!!! ‼💎‼🐚🔔🐚‼💎‼ पोस्ट दिल को छू गयी हो तो.. शेयर जरूर करे !!
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