अपने होठों से हमें पिला दो अगर, हम तो सारा मयखाना पी जाएँ ।। तुम रहो दिल में, चाहे दर्द बन कर, रोते-रोते ही सही, मगर जी जाएँ।। इश्क के रास्ते आसां तो न होंगे, चलो कुछ दूर तक हम भी जाएँ।। जब कभी रूठने का मौसम आता है, दिल तो करता है कि मर ही जाएँ।। इश्क उस रोज़ मुकम्मल होता है, जब दोनों तरफ से ज़ुर्रतें की जाएँ।। ज़िन्दगी को ख़ुशनुमा तब कहेंगे, जब इस के मीठे लम्हों को जी जाएँ।। जब से उन्हें जिस्म-ओ-जां बनाया, हमें हक़ ही नहीं कि साँसें ली जाएँ।।
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