आज फिर दिन वो पुराना मुझे याद आया है आज मौसम वो सुहाना मुझे याद आया है सहसा आज किसी ने जो पुकारा मुझको तेरा धीरे से बुलाना मुझे याद आया है मुद्दतों बाद किसी ने मेरा चेहरा देखा मेरे चेहरे का फ़साना मुझे याद आया है देख शबनम सी हँसी आज उनके चेहरे पर मुझे हर ग़म में हँसाना मुझे याद आया है मेरी बातों से ख़फ़ा ना हो मोहब्बत है ये किसी रूठे को मनाना मुझे याद आया है चलो इस बात को अब दफ़न यहीं करते हैं फ़िर कोई ज़ख्म पुराना मुझे याद आया है अब न छेड़ो ये मोहब्बत के तराने ‘कुंदन’ फिर कोई ख्व़ाब सजाना मुझे याद आया है
173 likes
50 shares