इस तरह सताया है परेशान किया है गोया की मुहब्बत नहीं एहसान किया है सोचा था की तुम दूसरों जैसे नहीं होगे तुम ने भी वही काम मेरी जान किया है मुश्किल था बहुत मेरे लिए तर्क-ए-ताल्लुक काम भी तुम ने मेरा आसान किया है हर रोज़ सजाते हैं तेरी हिज़्र में गुंचे आँखों को तेरी याद में गुलदान किया है
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