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Kabir Bose Love · Hindi · Romantic

☀*उठ जाता हूं..भोर से पहले..सपने सुहाने नही आते.*☀ 🤗*अब मुझे स्कूल न जाने वाले..बहाने बनाने नही आते..*😊 _*कभी पा लेते थे..घर से निकलते ही..मंजिल को..*_🏫🗾 _*अब मीलों सफर करके भी...ठिकाने नही आते..*_👐 _*मुंह चिढाती है..खाली जेब..महीने के आखिर में..*_ _*अब बचपन की तरह..गुल्लक में पैसे बचाने नही आते..*_🤔 _*यूं तो रखते हैं..बहुत से लोग..पलको पर मुझे..*_🤗 _*मगर बेमतलब बचपन की तरह गोदी उठाने नही आते..*_🤘 _*माना कि..जिम्मेदारियों की..बेड़ियों में जकड़ा हूं..*_ _*क्यूं बचपन की तरह छुड़वाने..वो दोस्त पुराने नही आते..*_👫👭👬 _*बहला रहा हूं बस दिल को बच्चों की तरह..*_🚶🏃 _*मैं जानता हूं..फिर वापस बीते हुए जमाने नही आते..* 😇😁😄😃😀

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