उसकी आँखों में मोहब्बत की चमक आज भी है हालांकि उसे मेरी मोहब्बत पर शक आज भी है नाव में बैठ कर धोये थे,हाथ उसने कभी पूरे तालाब में मेहंदी की महक आज भी है छू तो नहीं पाया उसे प्यार से कभी पर मेरे होठों पर उसके होठों की झलक आज भी है हर बार पूछते हैं,हमारी चाहत का सबब वैसी ही इश्क की ये परख आज भी है नहीं रह पते वो भी हमारे बिना दोनों तरफ इश्क की दहक आज भी है
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