कई दिनों बाद आज फिर तुम्हारी तस्वीर नजरो के सामने थी .,आँखें भी वही जिसमे कभी मैं खो गया था यक़ीनन मैं तुमसे कभी कह नहीं पाया ..पर जब भी तुम कभी मेरी इन आँखों में अपनी आँखें डालकर बात करती थी मैं असहज हो जाता था ...और हमेशा आकाश में शुन्य की तरफ देखने लग जाता था ..बहुत ही ऐसे लोग हैं जो इस नजर को कभी समझ नहीं पाएंगे ....लेकिन शायद मैंने एक अधूरा सा ख्वाब इन नजरो मैं देखा था ..मैंने देखा था मोहब्बत इन आँखों में , किसी ने शायद सच ही कहा है " शौक- ए -दीदार है तो नजर पैदा कर "" | मैंने तुममे और तुम्हारे इन आँखों में खुद को देखा है कभी ...मुझे पता है बहुत सारी बातें हैं जो तुम मुझसे कहना चाहती थी ,पूछना चाहती थी पर कभी पूछ नहीं पायी ..ठीक उसी तरह जिस तरह मैं तुम्हारे सामने होने पर कुछ पूछ नहीं पाता था ,कुछ कह नहीं पाता था ..उस शायर की बात याद आ जाती है जिसने कहा था की ""वो सामने आये तो अजब तमाशा हुआ ,हर शिकायत ने जैसे ख़ुदकुशी कर ली हो "" मुझे यकीं है वो चाहे facebook हो या whatsapp.तुम मुझे जरूर आकर एक बार देखती होगी ...आगे की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही बीतेगी तुम भी मेरेTimeline पर आया करोगी और मैं भी तुम्हारे Timelineपर , और हर बार Typingके बाद Enterबटन पर क्लिक नहीं करूंगा Clear बटन दबाकर छोड़ दूँगा...बस यही कहूँगा की लोग आते हैं और चले जाते हैं ,मात्र यादें ही छोड़ जाते हैं .हम यूँ ही एक दूसरे के Profile पर जाकर कभी खुश हो लेंगे ,कभी रो लेंगे और जिंदगी एक दिन समाप्त हो जायेगी .........
143 likes
3 shares