R Riya Deshmukh Love · Hindi · Romantic कितने अरमानों को दफनाये बैठा हूँ; कितने ज़ख्मों को दबाये बैठा हूँ; मिलना मुश्किल है उनसे इस दौर में; फिर भी दीदार की आस लगाये बैठा हूँ। loveromanticकितनेअरमानोंदफनाये 205 likes 54 shares WhatsApp Copy