गाता रहे मेरा दिल, तू ही मेरी मंज़िल कहीं बीते ना ये रातें, कहीं बीते ना ये दिन प्यार करनेवाले अरे प्यार ही करेंगे जलनेवाले चाहे जल जल मरेंगे मिलके जो धड़के हैं दो दिल, हरदम ये कहेंगे कहीं बीते ना ये रातें ... ओ मेरे हमराही मेरी बाह थामे चलना बदले दुनिया सारी, तुम ना बदलना प्यार हमे भी सिखला देगा, गर्दिश में संभलना कहीं बीते ना ये रातें ... दूरियाँ अब कैसी अरे शाम जा रही है हमको ढलते ढलते समझा रही है आती जाती साँस जाने कब से गा रही है कहीं बीते ना ये रातें ... गीतकार : शैलेन्द्र, गायक : लता - किशोर, संगीतकार : सचिन देव बर्मन, चित्रपट : गाईड (१९६५)
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