गहरी बात लिख दी है किसी नें 👌👌👌 👉बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में। उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।। 👉सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे। बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।। 👉लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार। पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।। 👉वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के लिए। घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई को बदलते देखा है।। 👉सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को। आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।। 👉जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन। आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है।। 👉जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी। आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है।। 👉दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था जिस बेटी को जबरन बाप ने। आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है।। 👉मारा गया वो पंडित बे मौत सड़क दुर्घटना में यारो। जिसे खुद को काल, सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है।। 👉जिसे घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों। आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।। 👉बन्द कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर। अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।। 👉आत्म हत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर। अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।। 👉गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है उन्होंने देख लिया कि। इंसान हमसे अच्छा नोंचता है।। 👉कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर। क्या मस्त तलवे चाटते हुए इंसान देखा है।। 👉इस कविता को मैने आप तक पहुंचाने मे र्सिफ उंगली का उपयोग किया है। और रचियता को सादर नमन 🙏🙏🙏 ं किया है.
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