चुरा लिया है तुमने जो दिल को नजर नहीं चुराना सनम बदल के मेरी तुम जिंदगानी कही बदल ना जाना सनम ले लिया दिल, हाय मेरा दिल हाय दिल लेकर मुझको ना बहलाना बहार बन के आऊँ कभी तुम्हारी दुनिया में गुजर ना जाए ये दिन कही इसी तमन्ना में तुम मेरे हो, तुम मेरे हो आज तो इतना वादा करते जाना सजाऊंगा लूट कर भी, तेरे बदन की डाली को लहू जिगर का दूंगा, हसीं लबों की लाली को है वफ़ा क्या, इस जहां को एक दिन दिखलादूंगा मैं दीवाना अकेले मेरे अरमां तड़प तड़पके क्यों रोते मेरे भी दिन क्या होते जो तुम मेरे लिए होते तुम मेरे हो, तुम मेरे हो आज तो इतना वादा करते जाना गीतकार : मजरुह सुलतानपुरी, गायक : आशा - रफी, संगीतकार : राहुलदेव बर्मन, चित्रपट : यादों की बारात (१९७३)
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