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Tara Mehta Love · Hindi · Romantic

जिक्रा ना कर कलम से किसी हस्ती का मैं लिखता हूं दर्द पीरो के अपनी बस्ती का कभी हो मिलना आ जाना जलती तपिश हम दिखलाएंगे खुद्दारी वतन परस्ती का ।।

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