Back to feed
D
Dhruv Rao Family · Marathi · Family

जबरदस्त विचार, म्हणुन आजची दुसरी पोस्ट टाकत आहे। एक भिखारी एक दिन अमेरिका के एक अरबपति एण्ड्रू कार्नेगी के पास गया। सुबह ही सुबह जाकर उसने बड़ा शोरगुल मचाया। तो एण्ड्रू कार्नेगी खुद बाहर आया और उसने कहा कि इतना शोरगुल मचाते हो! और भीख मांगनी हो तो वक्त से मांगने आओ! अभी सूरज भी नहीं निकला है, अभी मैं सो रहा था। उस भिखारी ने कहा, रुकिए; अगर मैं आपके व्यवसाय के संबंध में कोई सलाह दूं आपको अच्छा लगेगा? एण्ड्रू कार्नेगी ने कहा कि बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा। तुम सलाह दे भी क्या सकते हो मेरे व्यवसाय के संबंध में! तुम्हारा कोई अनुभव नहीं है। उस भिखारी ने कहा, आप भी मत दें सलाह। आपको भी कोई अनुभव नहीं है। जब तक हम उत्पात न करें, तब तक कोई देता है? वक्त से आने पर आपसे मिलना ही मुश्किल था। सेक्रेटरी होता, पहरेदार होते। अभी बेवक्त आया हूं तो सीधा आपसे मिलना हो गया। सलाह आप मुझको मत दें, मेरा पुराना धंधा है, और बपौती है, बाप—दादे भी यही करते रहे हैं। एण्ड्रू कार्नेगी ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि मैं खुश हुआ उस आदमी की बात से। मैंने उससे कहा कि तुम क्या चाहते हो? उस आदमी ने कहा कि मैं ऐसे मुफ्त कभी किसी से कुछ लेता नहीं। मैं कोई भिखारी नहीं हूं। लेकिन एक काम मैं कर सकता हूं जो आप नहीं कर सकते। और अगर कुछ दाव पर लगाने की इच्छा हो, तो बोलिए! एण्ड्रू कार्नेगी ने लिखा है कि मुझे भी रस लगा कि वह क्या कह रहा है। कौन—सा काम है, जो वह कर सकता है और मैं नहीं कर सकता! तो मैंने उससे कहा, अच्छा, सौ डालर दाव पर। वह कौन—सा काम है? उसने कहा कि मैं एक सर्टिफिकेट ला सकता हूं कि मैं भिखारी हूं पर आप सर्टिफिकेट नहीं ला सकते। एण्ड्रू कार्नेगी ने अपने संस्मरण में लिखा है, सौ डालर मैंने उसे दिए, लेकिन फिर मैं सोचता रहा कि सर्टिफिकेट मैं ला सकूं या न ला सकुं भिखारी तो मैं भी हूं। अरबों रुपए मेरे पास हैं, इससे क्या फर्क पड़ता है! भीख तो जारी है, अभी भी मांग तो जारी है, अभी भी मैं खोज तो रहा ही हूं। " कोई मुझे सर्टिफिकेट नहीं देगा, क्योंकि अगर मैं भिखारी हूं तो इस जगत में कोई भी समृद्ध नहीं है।" ओशो - गीता दर्शन

251 likes 33 shares
WhatsApp