झिलमिलाती हुई ये लौ कह रही, यूँ ही जलती रहूँ रौशनी गर मिले.. निगहबानी करूँ बन के कांटा तेरी, कली उम्मीद की, खुशी बन खिले.. रात भर जो अंधेरो से लड़ता रहा, सिला भी तो कुछ उस दिये को मिले.. मेरा साया लिपट मुझसे कहने लगा, बाद मुद्दत मुझे आज हो तुम मिले... आओ मिल कर मनाएँ दीवाली "रवीन्द्र", छोड़कर रंजो ग़म, सारे शिकवे गिले..... आप सभी के जीवन में खुशियों का दीपक सदैव जगमगाता रहे... 💐💐💐💐💐💐💐💐💐🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
86 likes
82 shares