तुम बिन जिया जाए कैसे कैसे जिया जाए तुम बिन सदियों से लम्बी हैं रातें सदियों से लम्बे हुए दिन आ जाओ लौट कर तुम ये दिल कह रहा है फिर शाम-ए-तन्हाई जागी फिर याद तुम आ रहे हो फिर जां निकलने लगी है फिर मुझको तड़पा रहे हो इस दिल में यादों के मेले हैं तुम बिन बहुत हम अकेले हैं आ जाओ... क्या-क्या न सोचा था मैंने क्या-क्या न सपने सजाए क्या-क्या न चाहा था दिल ने क्या-क्या न अरमां जगाए इस दिल से तूफ़ां गुजरते हैं तुम बिन तो जीते न मरते हैं आ जाओ... Misss you........
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