Back to feed
D
Diya Rao Love · Mixed · Romantic

तेरे तीर-ए-नीम-क़श को...कोई मेरे दिल से पूछे! ये ख़लिश कहाँ से होती....जो जिगर के पार होता! (Ghalib) ◆◆◆◆◆◆◆◆●●●●●●●●●●● फिर वो भूली-सी याद आई है ऐ ग़म-ए-दिल तेरी दुहाई है फिर वो भूली-सी याद आई है बात इतनी-सी है कहानी में... हम भी मारे गए जवानी में!!! आग सीने में ख़ुद लगाई है.... फिर वो भूली-सी याद आई है!!! आके मंज़िल पे खो गए हम-तुम... अजनबी फिर से हो गए हम-तुम!! ये असीरी है या रिहाई है.... फिर वो भूली-सी याद आई है!!! आँख में बूँदभर जो पानी है... प्यार की इक यही निशानी है!!! रोते बीती है जो बिताई है.... फिर वो भूली-सी याद आई है!!!💝💝💝💝💝💝💝

72 likes 45 shares
WhatsApp