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Vihaan Bhat Good_Morning · Marathi · Good_Morning

*दुःख में स्वयं की एक अंगुली* *आंसू पोंछती है ;* *और सुख में दसो अंगुलियाँ* *ताली बजाती है ;* *जब स्वयं का शरीर ही ऐसा* *करता है तो* *दुनिया से क्या गिला-शिकवा* *क्या करना...!!* *अतः* *हँसते रहिये, हँसाते रहिये* *और* *सबका भला करते रहिये..!!* सुप्रभात् 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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