"दुनिया" के "दस्तूर" इस तरह "निभाये" हैं "मैंने", "ओढ़कर" चेहरे पे "हँसी", अपने "ग़म" "छुपाये" हैं "मैंने".... "लोग" कहते हैं कि, "ख़ुशमिज़ाज" हूँ "मैं", "मगर इन "आँखों" से, "समन्दर" "बहाये" हैं "मैंने".... ⚘🌹⚘🌹⚘🌹⚘🌹⚘🌹⚘🌹⚘🌹⚘
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