दिल कहता है चल उनसे मिल, उठते है कदम, रुक जाते है, दिल हमको कभी समझाता है, हम दिल को कभी समझाते है.. हम जब से है जुदा, ऐ मेरे हम नशी यू देखो तो मेरे दामन मे क्या नही दौलत का चांद है शोहरत की चांदनी मगर तुम्हे खोके लगे है मुझे ऐसा के तुम नही तो कुछ भी नही तुम क्या जानो अब हम कितना दिल ही दिल मे पछताते है दिल हमको कभी समझाता है हम दिल को कभी समझाते है वो दिन थे क्या हसी, दोनो थे साथ मे और बाहे आप की थी मेरे हाथ मे तुम ही तुम है सनम मेरे दिन रात मे पर इतनी बुलंदी पे तुम हो मेरी जान आये न दामन अब हाथ मे पाना तुमको मुमकिन ही नही सोचे भी तो हम घबराते है दिल हमको कभी समझाता है हम दिल को कभी समझाते है दिल कहता है चल उनसे मिल उठते है कदम, रुक जाते है...
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