नारी सरस्वती तुम ....लक्ष्मी भी तुम.....और दुर्गा काली भी तुम....... ममता की मूर्त तुम..... संस्कारो की खान तुम.... ज्ञान का सागर भी तुम... और त्याग की पहचान भी तुम... कभी गुलाब की तरह कोमल तुम तो कभी हिमालय सी चट्टान भी तुम....... नारी के हर रूप को है शत शत नमन
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