*प्रवृत्तवाक् विचित्रकथ ऊहवान् प्रतिभानवान्। आशु ग्रन्थस्य वक्ता च यः स पण्डित उच्यते ॥* *भावार्थ :* जो व्यक्ति बोलने की कला में निपुण हो, जिसकी वाणी लोगों को आकर्षित करे, जो किसी भी ग्रंथ की मूल बातों को शीघ्र ग्रहण करके बता सकता हो, जो तर्क-वितर्क में निपुण हो, वही ज्ञानी है । 🙏🏻 *जय श्री राम* 🙏🏻 🙏🏻 *जय श्री कृष्णा* 🙏🏻 🙏🏻 *राधे राधे* 🙏🏻
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