मैं इतने शोर शराबे में बात क्या करता बिता भी देता तेरे घर में रात क्या करता मैं चाहता था तेरे साथ जीना और मरना तेरे बगैर हुई वारदात क्या करता तुम एक डाल पर खुश हो तो तुमसे क्या शिकवा मुझे तो डोलना था पात -पात क्या करता वो जंग लड़ता तो मैं सामना करता उसका पर उसने मुझपे लगाई थी घात क्या करता मैं जिंदगी को मुहब्बत ही मानता हूँ दोस्त मैं फिर किसी को भी शह और मात क्या करता
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