ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है जो उनपे गुज़रती है किसने उसे जाना है अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है आँखों में नमी-सी है चुप-चुप-से वो बैठे हैं नाज़ुक-सी निगाहों में नाज़ुक-सा फ़साना है ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना तो समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है या वो थे ख़फ़ा हमसे या हम थे ख़फ़ा उनसे कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है
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