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Atharv Mehta
Good_Morning · Marathi · Good_Morning
यूँ ज़मीं पर बैठकर क्यों आसमान देखता है.. पंखों को खोल, 🕊क्योंकि, ज़माना सिर्फ़ *उड़ान* देखता है !! लहरों की तो *फ़ितरत* ही है शोर मचाने की.. लेकिन *मंज़िल* उसी की होती है, जो नज़रों से *तूफ़ान* देखता है !! *🍀❣सुप्रभात*❣🍀
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