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Dhruv Reddy Good_Morning · Marathi · Good_Morning

*रोटी से विचित्र कुछ भी नहीं है... इंसान कमाने के लिए भी दौड़ता है... और पचाने के लिए भी दौड़ता है ....* *"नहा कर गंगा में सब पाप धो आया ...* *वहीं से धोये पापों का पानी भर लाया ....* *वाह रे इन्सान तरीका तेरा समझ में नहीं आया..*. *"पाप हमारी सोच से होता हैं,* *शरीर से नही* *और* *तीर्थों का जल,* *हमारे शरीर को साफ करता हैं,* *हमारी सोच को नही।"* *☘सुप्रभात☘*

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