राधे राधे🙏🏻 महाभारत का सबसे शक्तिशाली योद्धा बर्बरीक :- महाभारत प्रारम्भ होने से पहले श्रीकृष्ण ने सभी योद्धाओ से पूछा की यह युद्ध अकेले समाप्त करने में सभी योद्धाओ को कितना समय लगेगा. भीष्म ने कहा उन्हें 20 दिन लगेंगे। द्रोणाचार्य का उत्तर था 25 दिन। करण ने कहा 24 दिन मांगे । वही अर्जुन ने 28दिन। परन्तु बर्बरीक के उत्तर ने कृष्ण भगवान को आश्चर्यचकित कर दिया. बर्बरीक ने कहा उन्हें मात्र 1 मिनट ही चाहिए इस युद्ध पर विजय हासिल करने पर वो भी सिर्फ अपने बल पर। कथा कुछ इस प्रकार है:- भीम का पोता और घटोत्कच का पुत्र बर्बरीक। बर्बरीक को युद्ध की कला का ज्ञान अपनी माँ मौर्वी से प्राप्त हुआ था. वह अपने बचपन से ही बहादुर योद्धा था बर्बरीक की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उससे 3 तीरो से सम्मानित किया पहले तीर उसके दुश्मनो को लाल श्याही से रंग देगा दूसरा तीर उससे जिससे बर्बरीक बचाना चाहता है तीसरा तीर उन सभी चीज़ो को नष्ट कर देगा जिन्हे पहले तीर से रंगा गया है या फिर वह सभी चीज़े जिन्हे रंगा नही गया। बर्बरीक के गुरु ने गुरु दक्षिणा के रूप में उससे 2 वचन लिए 1. बर्बरीक अपने व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए तीर का इस्तेमाल न करें। 2. बर्बरीक हमेशा युद्ध के कमज़ोर वर्ग के साथ हो। कृष्ण भगवान बर्बरीक की शक्तियों का विश्लेषण करना चाहते थे इसलिए वह बर्बरीक से मिलने गए और उससे अपने तीरो का प्रदर्शन करने को कहा कृष्ण ने बर्बरीक को कहा की वह अपनी शक्तियाँ एक वृक्ष पर दिखाए. मान लें की वृक्ष की एक एक पत्तियाँ उसकी शत्रु है और हर पत्ती के आर पार छेद कर दें। बर्बरीक ने ध्यान लगाना शुरू कर दिया जब बर्बरीक ध्यान लगा रहा था कृष्ण भगवान ने एक पत्ती को तोडा और अपने पाँव के नीचे दबा लिया पहला तीर छूटा और उसने सभी पत्तियों को लाल रंग से रंग दिया और दूसरा तीर उन सभी पत्तियों में छेद करता चला गया जिन्हे लाल रंग से रंगा गया था। फिर तीसरा तीर कृष्ण के पेरो को भी चीरता हुआ निकल गया. कृष्ण अचम्भे में पड़ गए और उन्हें महसूस हुआ की ऐसी कोई ताकत नहीं है जो बर्बरीक की शक्तियों के आगे टिक सके। तब कृष्ण ने बर्बरीक से पूछा की वह किस की तरफ से युद्ध लड़ना चाहेगा तब बर्बरीक ने बताया की अपने गुरु को दिए हुए वचन के अनुसार वो कमज़ोर वर्ग की ओर से युद्ध का हिस्सा बनेगा तब कृष्णा ने बर्बरीक की बात का विरोध करते हुए कहा की 3 तीरो की शक्ति मिलकर उससे युद्ध भूमि पर सबसे शक्तिशाली योद्धा बनाती है इसलिए उसके किसी भी वर्ग का पक्ष लेने पर दूसरे वर्ग को कमज़ोर बना देगा, आखिर में बार बार कमज़ोर का साथ देते उससे सबको नष्ट करना पड़ेगा स्वयं को भी।ऐसे हालातो को रोकने के लिए कृष्ण ने बर्बरीक का सर माँगा पर बर्बरीक ने जब महाभारत जैसे महाकाव्य युद्ध को देखने की जिज्ञासा प्रकट की तो कृष्ण ने उन्हें यह कहकर दिलासा दिया की उसका सर धड़ से अलग होने के बावजूद भी उसका सर सचेत अवस्था में होगा और उससे एक पहाड़ की छोटी पर रखा जाएगा ताकि वह पूरा युद्ध देख सके। एक सच्चा योद्धा और कृष्ण का शिष्य होने का धर्म निभाते हुए बर्बरीक अपना सर धड़ से अलग करने को राज़ी हो गया। कृष्ण का वचन निभाते हुए भीम ने तब उस महान क्षत्रिय का सर पहाड़ी की चोटी पर स्थापित किया महाभारत युद्ध का इकलौता तटस्थ गवाह बर्बरीक ही था। आज भी बर्बरीक का मन्दिर राजस्थान में जयपुर के पास रींगस से कुछ दुरी पर श्याम जी खाटूवाले के नाम से प्रसिद्ध हैं।प्रतिदिन लाखों श्रृद्धालु यहां अपनी मनोकामना पुर्ति के लिये आते हैं। त्रुटी के लिये क्षमाप्रार्थी हूँ।🙏🏻
95 likes
22 shares