लहरें न जाने क्या क्या लेकर आयीं इक हँसी, इक धूप चेहरे की इक छोटा सा चाँद, इक खत का टुकड़ा किसी हार से टूटा हुआ वो मोती और उस घरौंदे की रेत जो इस किनारे पर तुमने बनाया था....... .....ये सब तुम्हारा था जो आज मेरा है💝💝💝💝💝💝💝💝
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