होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो बन जाओ मीत मेरे मेरी प्रीत अमर कर दो होठों से छू लो ना उम्र की सीमा हो ना जन्म का हो बंधन जब प्यार करे कोई, तो देखे केवल मन नई रीत चला कर तुम ये रीत अमर कर दो होठों से छू लो आकाश का सूनापन मेरे तनहा मन में पायल छनकाती तुम आ जाओ जीवन में सांसें देकर अपनी संगीत अमर कर दो होठों से छू लो जग ने छीना मुझसे, मुझे जो भी लगा प्यारा सब जीता किये मुझसे, मैं हरदम ही हारा तुम हार के दिल अपना मेरी जीत अमर कर दो होठों से छू लो❤️❣️❤️❣️❣️❤️❣️❤️❣️❣️❤️❣️❤️❣️❤️❣️❤️❣️
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