A Aadhya Sharma Life · Hindi · Life हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली; कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली; सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ; वो जिंदगी ही क्या जो छाँव-छाँव चली। lifeशहरनिकलीगाँवचली 80 likes 2 shares WhatsApp Copy