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Aadhya Sharma Life · Hindi · Life

​हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली​; कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली​;​ सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ​; वो जिंदगी ही क्या जो छाँव​-​छाँव चली​।

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