हर जनम में....🎉🎊🎀 हर जनम में उसी की चाहत थे;😍 हम किसी और की अमानत थे;😇👈 उसकी आँखों में झिलमिलाती हुई;👸 हम ग़ज़ल की कोई अलामत थे; तेरी चादर 🗾में तन समेट लिया;🎇 हम कहाँ के दराज़क़ामत थे;🎆 जैसे जंगल 🏞में आग लग जाये; हम कभी इतने ख़ूबसूरत थे;🌠 पास रहकर भी दूर-दूर रहे;🌇🏙 हम नये दौर की 🎶💓मोहब्बत थे; इस ख़ुशी 👫🎄में मुझे ख़याल आया; ग़म के दिन कितने ख़ूबसूरत👌👌 थे दिन में इन जुगनुओं 🌷🌹से क्या लेना;🤘 ये दिये रात ✨की ज़रूरत थे।🌻
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