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Dhruv Patel Patriotic · Marathi · Patriotic

*अब बस यही कहऩा हैं,* *अब और नही सहऩा हैं |* *चाहें कुछ भी हो जाए,* *अब बस खून ही बहऩा हैं |* आजादी में नोंच लिया था तुमने भारतमाता को, लहूलुहान कर भेज दिया था तुमने, अपनेही अन्नदाता को| ऐसे नापाक़ कमीने हो तुम हमको क्या बताते हो? जिस थाली में खाते हो तुम, उसी में छेद बनाते हो| कोई अमन में शांती नहीं जबसे तुमको जन्म दिया, क्या मनहूस वो मौका था, जो पाकिस्तान पैदा हुवा | जिन्नाह की औलादों को अब मिलके बतला देंगे, हाफिज, दाऊद के बाशिंदों से हम कूट कूट बदला लेंगे| *मातृभूमी के खातीर यारों,* *हमनें तो कफ़नही पहऩा हैं|* *चाहें कुछ भी हो जाए,* *अब बस खून ही बहऩा हैं |* घुसकर मारेंगे तुमको तो, कफन नसिब नहीं होगा, नक्शेपर इस दुनिया के तो नामोनिशान नहीं होगा| याद रखो की सिंधू नदी भी कभी भारत में बहती थी, गुरु गोविंद, प्रताप, शिवाका वही इतिहास कहती थी| आज भी तुम्हारी मिट्टी को मेरी भारत की गंध आती होगी, चिल्ला चिल्ला के वह आज भी हमसे मिलने की बातें कहती होगी| अब के बार जो सरक गयी तो, लाहोर, कराची लिटा देंगे, सरहद बढेंगी अफ़गाणी तक पाकिस्तान मिटा देंगे.... भारतमाँ फिरसे अखंड होगी, फिरसे तिरंगा लहराएगा... भारतमाता की जयजयकार हर पाकिस्तानी बोलेगा | *याद रहें तुमको ये, इक दिन* *भारत में ही रहना हैं |* *चाहें कुछ भी हो जाए,* *अब बस खून ही बहऩा हैं |*

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