आप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं आप से भी खूबसूरत आप के अंदाज हैं लब हिले तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं आप की आँखों में क्या साहिल भी मिलते हैं कहीं आप की खामोशियाँ भी आप की आवाज हैं आप की बातों में फिर कोई शरारत तो नहीं बेवजह तारीफ़ करना आप की आदत तो नहीं आप की बदमाशियों के ये नए अंदाज हैं गीतकार : गुलज़ार, गायक : लता - किशोर, संगीतकार : राहुलदेव बर्मन, चित्रपट : घर (१९७८)
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