*एडमिरैबिलिटी विधेयक, 2016 की मुख्य विशेषताएं-* *एडमिरैलिटी विधेयक 2016 प्रस्ताव समुद्री कानूनी बिरादरी द्वारा की जा रही मांग का समर्थन करेगा.* विधेयक भारत के तटवर्ती राज्यों के उच्च न्यायालयोंको एडमिरैलिटी क्षेत्राधिकार प्रदान करता है.क्षेत्राधिकार का विस्तार समुद्री सीमा तक है. केंद्र सरकार की अधिसूचना के माध्यम से क्षेत्राधिकार में विस्तार भी किया जा सकता है.यह विस्तार किसी विशेष आर्थिक क्षेत्र या भारत के किसी अन्य समुद्री क्षेत्र या भारत की प्रादेशिक सीमा के दायरे में किसी द्वीप तक हो सकता है.एडमिरैबिलिटी विधेयक सभी समुद्री जहाजों पर लागू होगा. जहाज के मालिक का आवास/ निवास कहीं भी हो. अंतर्देशीय निर्माणाधीन जहाज इसके दायरे में नहीं ले गए हैं. आवश्यकता होने पर केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करके इनको भी इसके दायरे में ला सकती है.विधेयक युद्धपोत एवं नौसेना के बड़े के सहायक जहाज औरगैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग किए जाने वाले जहाजों पर लागू नहीं है. समुद्री दावों के मामलों में सुरक्षा के दृष्टिगत जहाज को निश्चित परिस्थितियों में जब्त किया जा सकता है.किसी जहाज पर चुनिंदा समुद्री दावों के संबंध में दायित्य उसके नए मालिक को निर्धारित समय सीमा के भीतर मैरिटाइम लिएन्स के तहत हस्तांतरित किया जाएगा. जिन पहलुओं हेतु विधेयक में प्रावधान नहीं किए गए हैं उन पर सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 लागू की जाएगी.
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