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Dhruv Deshmukh
Friendship · Marathi · Friendship
✏ *कितने खुबसूरत हुआ करते थे* *बचपन के वो दिन...* *जिसमें दुश्मनी की जगह सिर्फ* *एक कट्टी हुआ करती थी* *और सिर्फ दो उंगलिया जुडने से* *दोस्ती फिर शुरू हो जाती थी...* *🌻😊Good Evening😊🌻*
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