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Arjun Yadav Patriotic · Hindi · Patriotic

कतारें थककर भी खामोश हैं, मगर महल में बैठे बोल रहें हैं। नदी बहकर भी चुप हें मगर, किनारे बोल रहें हैं।। ये कैसा जलजला आया है, इन दिनों, झोपड़ी खड़ी है, मगर महल ड़ोल रहें हैं।। परिंदों को तो रोज कही से अपने लिए दाने जुटाना है, मगर वे क्यों परेशां हैं जिनके घरों में--भरे तहखाने हैं। *28 को भारत बंद नहीँ रहेगा*

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