Back to feed
S
Shaurya Sharma Family · Hindi · Family

✳कदम रुक गए जब पहुंचे हम "रिश्तो" के बाज़ार में.. ✳बिक रहे थे रिश्ते, खुले आम व्यापार में.. ✳कांपते होठों से मैंने पूँछा, "क्या "भाव" है भाई इन रिश्तों का..?" ✳ दुकानदार बोला:- ✳ "कौन सा लोगे..? ✳ बेटे का ..या बाप का..? ✳ बहिन का..या भाई का..? ✳ बोलो कौन सा चाहिए..? ✳ इंसानियत का..या प्रेम का..? ✳ माँ का..या विश्वास का..? ✳बाबूजी कुछ तो बोलो कौन. सा चाहिए?? ✳चुपचाप खड़े हो कुछ बोलो तो सही... ✳मैंने डर कर पूँछ लिया "दोस्त का.." ✳दुकानदार नम आँखों से बोला:- ✳"संसार इसी रिश्ते पर ही तो टिका है..." ✳माफ़ करना बाबूजी ये "रिश्ता बिकाऊ नहीं है.. ✳इसका कोई मोल नहीं लगा पाओगे, ✳और. जिस दिन ये बिक जायेगा... ✳उस दिन ये संसार उजड़ जायेगा..... ✌सभी मित्रों को समर्पित..

11 likes 33 shares
WhatsApp