घोर कलयुगी समय हैं भैया रावण की दुनियाँ का संकेत हैं भैया जब हनुमंत लला ने अशोक वाटिका फलांगी समय घनघोर रात्रि का था गीत गाने का जश्न सजा था राक्षसों की सेना का भोजन पानी चल रहा था यही हाल हैं आज की दुनियाँ का यारों रात में सितारे जगमगाते हैं दिन दहाड़े सोये पड़े होते हैं कैसी कलयुगी छाप पड़ी हैं सारी दुनियाँ रावण की सेना बनी हैं
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