"न मैं *गिरा* और न मेरी उम्मीदों के *मीनार* गिरे..! पर.. *लोग* मुझे गिराने मे कई बार *गिरे*...!!" सवाल जहर का नहीं था वो तो मैं पी गया, तकलीफ लोगों को तब हुई, जब मैं *जी गया.* *डाली पर बैठे हुए परिंदे को पता है कि डाली कमज़ोर है ..* *फिर भी वो उस डाली पर बैठता है क़्योकी उसको डाली से ज़यादा अपने पंख पर भरोसा है. ".........* "मुस्कुराना" सीखना पड़ता है ...!* *"रोना" तो पैदा होते ही आ जाता हैं* 🌺🌿 *शुभ प्रभात्* 🍁🍀
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