बेटी जो दिलो को जोड़ देती है, बेटी जो साँसो को जन्म देती है, बेटी जो परायो को अपना बना देती है, बेटी जो पिढ़िया बना देती है, बेटी जो पराये धन पर अपना हक बना देती है, बेटी जो पराई आँखो में जगह बना लेती है, बेटी जो पराये दिलो को चुरा लेती है, बेटी जो ज़मीन को मकान और मकान को घर बना देती है, बेटी जो गम में दिल और मन से रोती है, बेटी जो समुद्र के तेज़ वेग को भी निर्मल स्वर में पिरोति है, बेटी के तो आँख का आंसू भी मोती है . . . बेटी बचाव बेटी पढाओ...
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