मुझे लोग समझदार कहते हैं उन्हें क्या पता इस समझ को पाने के लिए कितनी नासमझियाँ निभाईं हैं मैंने मुझे लोग व्यावहारिक कहते हैं उन्हें क्या पता इस व्यवहार को पाने के लिए कितनी बेवक़ूफ़ियाँ निभाईं हैं मैंने मुझे लोग बहुत मज़बूत कहते हैं उन्हें क्या पता कितनी खोखली ज़मीं पे यह मज़बूती बनायी है मैंने मुझे लोग ईमानदार कहते हैं उन्हें क्या पता इस ईमानदारी को पाने के लिए कितने बेईमान लोगों को झेला है मैंने मुझे लोग विश्वासी कहते हैं उन्हें क्या पता इस विश्वास को पाने के लिए कितने ख़ंजर खाये हैं मैंने मुझे लोग आदमी कहते हैं उन्हें क्या पता इस रूप को पाने के लिए कितने जानवरों के साथ रहा हूँ मैं
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