ये मेरे देश की नारी तू क्यूँ है इतनी बेचारी तेरी शक्ति तेरी भक्ति तेरा हर एक रूप बड़ा है तू है दुर्गा तू है काली सबने ये स्वीकार किया है तू खुद को पहचान न पाती सारा जीवन यूँ ही बिताती सबका सब कुछ सुनते सुनते
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