❋━━❥❥❥ श्री हरिः शरणम् ❋━━❥❥❥ · प्रेम से कहना..... जय श्री राधेकृष्णा..* मित्रगण कभी सोचा है कि... “ज्ञान बोझ है यदि वह आपके अंदर से प्रेम- भावना को धोखे या नफरत में बदलता है...? . ज्ञान बोझ है यदि वह प्रसन्नता और भोलापन नही लाता ....? ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह विचार देता है कि आप बुद्धिमान हैं बाकि दूसरे सब छोटे है...? ज्ञान बोझ है यदि वह आपको तन मन से स्वतंत्र नहीं करता ...? और ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह प्रतीत कराता है कि आप विशेष व्यक्ति हैं” ..क्योंकि मिट्टी मिटटी है सिर्फ....? और पूर्ण इंसान सिर्फ वही है जो परमात्मा की नज़रो में पूर्ण है .... ये सोचो कि....? “एक बड़े पहाड़ पर चढ़ने के बाद यही पता चलता है कि अभी ऐसे कई पहाड़ चढ़ने के लिए बाकि हैं...? . एक तू ही निरंकार एक तू ही साकार जय सीताराम जय राधेश्याम हरिॐ ॐ शाँति.....*
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