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Sai Mehta Spiritual · Hindi · Spiritual

हुस्न एक नशा -- हुस्न से बढ़कर नशा होता न कोई, हुस्न के पहलू से बढ़ जन्नत न कोई. हुस्न के दरबार से लौटे झुके बिन, ऐसा सिर धड़ पर कभी उपजा न कोई. हुस्न फरमाये करम तो अमन बरसे, हुन की तिरछी नजर से जंग छिड़ते. हुस्न ऐसा तीर जो खाली न जाता, हुस्न का मारा हुआ कब सम्भल पाता. हुस्न वो जादू जो सिर चढ़ बोलता है, हुुस्न के तेवर से जग भर डोलता है. हुस्न जब मचले तो जल उठता है पानी, हुस्न के दम से ही महफिल की रवानी.

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