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Manav Kumar Love · Marathi · Romantic

अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ ​....​ ​ ​ ​अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा​;​ जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा​;​ ​​ ​ ​ मरने की, अय दिल, और ही तदबीर कर, कि मैं;​ शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-का़तिल नहीं रहा​;​ ​ ​ वा कर दिए हैं शौक़ ने, बन्द-ए-नकाब-ए-हुस्न​;​ ग़ैर अज़ निगाह, अब कोई हाइल नहीं रहा​;​ ​ ​ बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता मगर असद ​;​ ​ जिस दिल पे नाज़ था मुझे, वो दिल नहीं रहा। ~ Mirza Ghalib

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