एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा जैसे खिलता गुलाब, जैसे शायर का ख़्वाब जैसे उजली किरण, जैसे बन में हिरन जैसे चांदनी रात, जैसे नर्मी की बात जैसे मंदिर में हो एक जलता दिया एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा जैसे सुबह का रूप, जैसे सर्दी की धूप जैसे बीना की तान, जैसे रंगों की जान जैसे बलखाए बेल, जैसे लहरों का खेल जैसे खुशबू लिए आए ठंडी हवा एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा जैसे नाचता मोर, जैसे रेशम की डोर जैसे परियों का राग, जैसे संदल की आग जैसे सोला सिंगार, जैसे रस की पुहार जैसे आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता नशा गीतकार : जावेद अख्तर, गायक : कुमार सानू, संगीतकार : राहुलदेव बर्मन, चित्रपट : १९४२ अ लव्ह स्टोरी (१९९५)
0 likes
0 shares