तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है अंधेरो से भी मिल रही रोशनी है कुछ भी नहीं है तो कोई गम नहीं है हर एक बेबसी बन गयी चांदनी है टूटी है कश्ती, तेज है धारा कभी ना कभी तो मिलेगा किनारा बही जा रही ये समय की नदी है इसे पार करने की आशा जगी है हर इक मुश्किल सरल लग रही है मुझे झोपडी भी महल लग रही है इन आँखों में माना नमी ही नमी है मगर इस नमी पर ही दुनिया थमी है मेरे साथ तुम मुस्कुरा के तो देखो उदासी का बादल हटा के तो देखो कभी हैं ये आँसू, कभी ये हँसी हैं मेरे हमसफ़र बस यही जिन्दगी है गीतकार : संतोष आनंद, गायक : लता मंगेशकर, संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, चित्रपट : प्यासा सावन (१९८१)
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