ताल से ताल मिले मोरे बबुआ, बाजे ढोल मृदंग मन से मन का मेल जो हो तो, रंग से मिल जाए रंग होरी खेले रघुवीरा अवध में होरी खेले रघुवीरा हाँ हिलमिल आवे लोग लुगाई भाई महलन में भीरा अवध में होरी खेले रघुवीरा... इनको शर्म नहीं आये देखे नाहीं अपनी उमरिया साठ बरस में इश्क लड़ाए मुखड़े पे रंग लगाए, बड़ा रंगीला सांवरिया चुनरी पे डाले अबीर अवध में होरी खेरे रघुवीरा... हे अब के फाग मोसे खेलो न होरी (हाँ हाँ ना खेलत ना खेलत) तोरी शपथ मैं उमरिया की थोरी (हाय हाय हाय चाचा) देखे है ऊपर से झांके नहीं अन्दर सजनिया उम्र चढ़ी है दिल तो जवान है बांहों में भरके मुझे ज़रा झनका दे पैंजनिया साँची कहे है कबीरा अवध में होरी खेले रघुवीरा... चित्रपट : बाग़बान (2003) संगीतकार : आदेश श्रीवास्तव गीतकार : समीर गायक : अमिताभ बच्चन, अलका याग्निक, सुखविंदर सिंह, उदित नारायण
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