ये ख्वाब सारे बिखर जाए तो अच्छा है किसी तरह ये रात गुजर जाए तो अच्छा है कहाँ आता है हमें तेरे बगैर जीना अभी तू कुछ दिन और ठहर जाए तो अच्छा है है दुनिया को पता मेरी गजल में तुम हो पर तुझ तक ये खबर जाए तो अच्छा है उसके आने की उम्मीद मुझे भी नहीं,पर जाते-जाते मुझे देख कर जाए तो अच्छा है सुनो,वो,मैं, कुछ नहीं,फिर कभी तेरी बातों से ये झिझक उतर जाए तो अच्छा है निकलना जरूरी है इस ख्वाबों की दुनिया से बुरा है उसका जाना,पर जाए तो अच्छा है चल रहा है दिल मेरा बहके हुए शराबी-सा जैसे-तैसे अब अपने ही घर जाए तो अच्छा है
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