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S
Sai Kumar Love · Marathi · Romantic

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो के न याद हो वही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो के न याद हो वो नये गिले वो शिकायतें वो मज़े-मज़े की हिकायतें वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो के न याद हो कोई बात ऐसी अगर हुई जो तुम्हारे जी को बुरी लगी तो बयाँ से पहले ही भूलना तुम्हें याद हो के न याद हो सुनो ज़िक्र है कई साल का, कोई वादा मुझ से था आप का वो निबाहने का तो ज़िक्र क्या, तुम्हें याद हो के न याद हो कभी हम में तुम में भी चाह थी, कभी हम से तुम से भी राह थी कभी हम भी तुम भी थे आश्ना, तुम्हें याद हो के न याद हो हुए इत्तेफ़ाक़ से गर बहम, वो वफ़ा जताने को दम-ब-दम गिला-ए-मलामत-ए-अर्क़बा, तुम्हें याद हो के न याद हो वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे पेश्तर, वो करम के था मेरे हाल पर मुझे सब है याद ज़रा-ज़रा, तुम्हें याद हो के न याद हो कभी बैठे सब में जो रू-ब-रू तो इशारतों ही से गुफ़्तगू वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो के न याद हो किया बात मैं ने वो कोठे की, मेरे दिल से साफ़ उतर गई तो कहा के जाने मेरी बाला, तुम्हें याद हो के न याद हो वो बिगड़ना वस्ल की रात का, वो न मानना किसी बात का वो नहीं-नहीं की हर आन अदा, तुम्हें याद हो के न याद हो जिसे आप गिनते थे आशना जिसे आप कहते थे बावफ़ा मैं वही हूँ "मोमिन"-ए-मुब्तला तुम्हें याद हो के न याद हो

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